Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.118.21: मैं सन्तान उत्पन्न करने की शक्ति खो चुका हूँ। मेरा गृहस्थ जीवन सन्तान उत्पन्न करने के गुणों से सर्वथा रहित हो गया है और वीर्य नष्ट होने के कारण मेरे लिए अत्यन्त दयनीय हो रहा है; अतः मैं अब इस घोर दुःखमय मार्ग पर नहीं चल सकता॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहं सुकृपणे मार्गे स्ववीर्यक्षयशोचिते।
स्वधर्मात् सततापेते चरेयं वीर्यवर्जित:॥ २१॥
अनुवाद
मैं सन्तान उत्पन्न करने की शक्ति खो चुका हूँ। मेरा गृहस्थ जीवन सन्तान उत्पन्न करने के गुणों से सर्वथा रहित हो गया है और वीर्य नष्ट होने के कारण मेरे लिए अत्यन्त दयनीय हो रहा है; अतः मैं अब इस घोर दुःखमय मार्ग पर नहीं चल सकता॥ 21॥
I have lost the power to beget children. My household life is completely devoid of the virtues of begetting children and is becoming very pitiable for me due to the loss of my semen; therefore, I cannot continue on this path of extreme misery anymore.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥