Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.118.20: मैं सदैव इसी प्रकार दृढ़तापूर्वक आचरण करते हुए मोक्ष के निर्भय मार्ग पर स्थित होकर इस शरीर का त्याग कर दूँगा।   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.118.20 
एतया सततं धृत्या चरन्नेवंप्रकारया।
देहं संस्थापयिष्यामि निर्भयं मार्गमास्थित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैं सदैव इसी प्रकार दृढ़तापूर्वक आचरण करते हुए मोक्ष के निर्भय मार्ग पर स्थित होकर इस शरीर का त्याग कर दूँगा।
 
Always acting in the above manner with such perseverance, I shall give up this body, being established on the fearless path of salvation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)