Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.118.19: मैं समस्त पापों से मुक्त हो जाऊँगा और अज्ञानजन्य समस्त बंधनों से पार हो जाऊँगा। मैं किसी के वश में न रहकर वायु की भाँति सर्वत्र विचरण करूँगा।॥19॥ | mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं समस्त पापों से मुक्त हो जाऊँगा और अज्ञानजन्य समस्त बंधनों से पार हो जाऊँगा। मैं किसी के वश में न रहकर वायु की भाँति सर्वत्र विचरण करूँगा।॥19॥
I shall be free from all sins and shall transcend all bonds born of ignorance. I shall roam everywhere like the wind, being not under anybody's control.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥