Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.118.17-18: मैं उन सभी सकाम कर्मों का त्याग करूँगा जो जीव अपनी उन्नति के लिए कर सकते हैं, क्योंकि वे सभी काल से सीमित हैं। मैं समस्त इन्द्रियों द्वारा क्षणिक फल देने वाले कर्मों के लिए किए जाने वाले प्रयत्नों का पूर्णतः त्याग करूँगा; मैं धर्म के फलों का भी त्याग करूँगा। मैं अपने हृदय के मैल को पूर्णतः धोकर पवित्र हो जाऊँगा॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  1.118.17-18 
या: काश्चिज्जीवता शक्या: कर्तुमभ्युदयक्रिया:।
ता: सर्वा: समतिक्रम्य निमेषादिव्यवस्थिता:॥ १७॥
तासु चाप्यनवस्थासु त्यक्तसर्वेन्द्रियक्रिय:।
सम्परित्यक्तधर्मार्थ: सुनिर्णिक्तात्मकल्मष:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मैं उन सभी सकाम कर्मों का त्याग करूँगा जो जीव अपनी उन्नति के लिए कर सकते हैं, क्योंकि वे सभी काल से सीमित हैं। मैं समस्त इन्द्रियों द्वारा क्षणिक फल देने वाले कर्मों के लिए किए जाने वाले प्रयत्नों का पूर्णतः त्याग करूँगा; मैं धर्म के फलों का भी त्याग करूँगा। मैं अपने हृदय के मैल को पूर्णतः धोकर पवित्र हो जाऊँगा॥17-18॥
 
I shall give up all the fruitive actions that can be performed by living beings for their own progress, because they are all limited by time. I shall completely give up the efforts made by all the senses for actions that give temporary results; I shall also give up the fruits of Dharma. I shall wash away the filth of my heart completely and become pure.॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)