Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.118.15-16: यदि कोई व्यक्ति मेरी एक भुजा कुल्हाड़ी से काट डाले और कोई दूसरा व्यक्ति मेरी दूसरी भुजा पर चंदन छिड़क दे, तो भी मैं न तो किसी के दुःख की चिन्ता करूँगा और न किसी के कल्याण की। मैं ऐसा कोई कार्य नहीं करूँगा जैसा कोई जीवित या मरणासन्न व्यक्ति करता है। मैं न तो जीवन की प्रशंसा करूँगा और न मृत्यु से घृणा करूँगा॥15-16॥ | mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वास्यैकं तक्षतो बाहुं चन्दनेनैकमुक्षत:।
नाकल्याणं न कल्याणं चिन्तयन्नुभयोस्तयो:॥ १५॥
न जिजीविषुवत् किंचिन्न मुमूर्षुवदाचरन्।
जीवितं मरणं चैव नाभिनन्दन् न च द्विषन्॥ १६॥
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति मेरी एक भुजा कुल्हाड़ी से काट डाले और कोई दूसरा व्यक्ति मेरी दूसरी भुजा पर चंदन छिड़क दे, तो भी मैं न तो किसी के दुःख की चिन्ता करूँगा और न किसी के कल्याण की। मैं ऐसा कोई कार्य नहीं करूँगा जैसा कोई जीवित या मरणासन्न व्यक्ति करता है। मैं न तो जीवन की प्रशंसा करूँगा और न मृत्यु से घृणा करूँगा॥15-16॥
If one person cuts off one of my arms with an axe and another person sprinkles sandalwood on my other arm, I will not worry about the ill-being of one of them or the well-being of the other. I will not do any such thing as a person who wants to live or die does. I will neither praise life nor hate death.॥15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥