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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.117.8 
संसक्तश्च तया मृग्या मानुषीमीरयन् गिरम्।
क्षणेन पतितो भूमौ विललापाकुलेन्द्रिय:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह हिरण के पास ही था कि क्षण भर में ही वह मनुष्य की भाँति बोलता हुआ भूमि पर गिर पड़ा। उसकी इन्द्रियाँ व्याकुल हो गईं और वह विलाप करने लगा। 8.
 
While still near the deer, he fell to the ground in a moment, speaking like a human being. His senses were disturbed and he started wailing. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)