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mahabharat 1.117.6: उसे देखते ही राजा पाण्डु ने स्वर्ण पंखयुक्त पांच सुन्दर, तीक्ष्ण एवं तीव्र बाणों से मृगी और मृगी दोनों को बींध डाला।   |   mahabharat अध्याय 1.117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.117.6 
ततस्तां च मृगीं तं च रुक्मपुङ्खै: सुपत्रिभि:।
निर्बिभेद शरैस्तीक्ष्णै: पाण्डु: पञ्चभिराशुगै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उसे देखते ही राजा पाण्डु ने स्वर्ण पंखयुक्त पांच सुन्दर, तीक्ष्ण एवं तीव्र बाणों से मृगी और मृगी दोनों को बींध डाला।
 
On seeing him, King Pandu pierced both the doe and the deer with five beautiful, sharp and swift arrows equipped with golden feathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)