Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.117.33: मैं सुख में डूबा हुआ था, परंतु जैसे तुमने मुझे दुःख में डाल दिया, वैसे ही जब तुम अपनी प्रिय पत्नी के साथ सुख का अनुभव करोगे, उसी क्षण तुम पर दुःख आ पड़ेगा ॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 1.117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वर्तमान: सुखे दु:खं यथाहं प्रापितस्त्वया।
तथा त्वां च सुखं प्राप्तं दु:खमभ्यागमिष्यति॥ ३३॥
अनुवाद
मैं सुख में डूबा हुआ था, परंतु जैसे तुमने मुझे दुःख में डाल दिया, वैसे ही जब तुम अपनी प्रिय पत्नी के साथ सुख का अनुभव करोगे, उसी क्षण तुम पर दुःख आ पड़ेगा ॥ 33॥
I was immersed in happiness, but just as you put me into sorrow, similarly when you will experience the happiness of being in the company of your beloved wife, sorrow will fall upon you at that very moment. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥