Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.117.32: हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ महाराज! अंत समय आने पर जिस प्यारी पत्नी के साथ आप संयोग करेंगे, वह समस्त प्राणियों के लिए दुर्गम यमलोक में जाते समय भक्तिपूर्वक आपका अनुसरण करेगी॥32॥ | mahabharat अध्याय 1.117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्तकाले हि संवासं यया गन्तासि कान्तया।
प्रेतराजपुरं प्राप्तं सर्वभूतदुरत्ययम्।
भक्त्या मतिमतां श्रेष्ठ सैव त्वानुगमिष्यति॥ ३२॥
अनुवाद
हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ महाराज! अंत समय आने पर जिस प्यारी पत्नी के साथ आप संयोग करेंगे, वह समस्त प्राणियों के लिए दुर्गम यमलोक में जाते समय भक्तिपूर्वक आपका अनुसरण करेगी॥32॥
Maharaja, the best among the wise! When the end comes, the lovely wife with whom you will unite, she will follow you with devotion when you go to Yamalok, which is inaccessible to all living beings. 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥