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mahabharat 1.117.31: जब तू भी काम से पूर्णतया मोहित होकर अपनी प्रिय पत्नी के साथ समागम करने लगेगा, तब मेरी ही भाँति इसी अवस्था में यमलोक को जाएगा ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 1.117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.117.31 
प्रियया सह संवासं प्राप्य कामविमोहित:।
त्वमप्यस्यामवस्थायां प्रेतलोकं गमिष्यसि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जब तू भी काम से पूर्णतया मोहित होकर अपनी प्रिय पत्नी के साथ समागम करने लगेगा, तब मेरी ही भाँति इसी अवस्था में यमलोक को जाएगा ॥31॥
 
When you too, being totally captivated by lust, will start having intercourse with your beloved wife, then you will go to Yamaloka in this same state as me. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)