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mahabharat 1.117.3: वे सभी महाबली पाण्डव देवराज इन्द्र के समान पराक्रमी थे। अंशावतार के प्रसंग में आपने ही उन्हें देवताओं का अंश बताया था॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.117.3 
ते हि सर्वे महात्मानो देवराजपराक्रमा:।
त्वयैवांशावतरणे देवभागा: प्रकीर्तिता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे सभी महाबली पाण्डव देवराज इन्द्र के समान पराक्रमी थे। अंशावतार के प्रसंग में आपने ही उन्हें देवताओं का अंश बताया था॥3॥
 
All those great Pandavas were as valiant as the king of gods Indra. In the context of Anshaavataran you yourself had told them that they were a part of the gods.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)