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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.117.20 
अस्यां मृग्यां च राजेन्द्र हर्षान्मैथुनमाचरम्।
पुरुषार्थफलं कर्तुं तत् त्वया विफलीकृतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! मैं इस हिरणी के साथ बड़े आनन्द और प्रसन्नता के साथ मैथुन करके अपनी काम-प्रवृत्ति को सफल कर रही थी; किन्तु तुमने उसे निष्फल कर दिया।
 
Rajendra! I was copulating with this deer with great joy and happiness to make my sexual endeavour successful; but you made it futile.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)