श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.117.19 
सर्वभूतहिते काले सर्वभूतेप्सिते तथा।
को हि विद्वान् मृगं हन्याच्चरन्तं मैथुनं वने॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो समय समस्त प्राणियों के लिए हितकर और इच्छित है, उस समय कौन बुद्धिमान् पुरुष वन में मैथुनरत मृग को मार सकता है? ॥19॥
 
At a time which is beneficial and desirable for all beings, which prudent man can kill a deer mating in the forest? ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)