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mahabharat 1.117.17: पाण्डु बोले, 'हे मृग! राजा लोग तो सचेत हों या असावधान, अनेक प्रकार के तीक्ष्ण शस्त्रों द्वारा बलपूर्वक मृगों का वध खुलेआम करते हैं। फिर तुम मेरी निन्दा क्यों करते हो?'   |   mahabharat अध्याय 1.117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.117.17 
पाण्डुरुवाच
प्रमत्तमप्रमत्तं वा विवृत्तं घ्नन्ति चौजसा।
उपायैर्विविधैस्तीक्ष्णै: कस्मान्मृग विगर्हसे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु बोले, 'हे मृग! राजा लोग तो सचेत हों या असावधान, अनेक प्रकार के तीक्ष्ण शस्त्रों द्वारा बलपूर्वक मृगों का वध खुलेआम करते हैं। फिर तुम मेरी निन्दा क्यों करते हो?'
 
Pandu said, 'O deer! Kings kill deer openly by force using various types of sharp means, whether they are alert or unwary. Then why do you criticize me?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)