Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.117.16: मृग बोला - मनुष्य अपने शत्रुओं पर भी बाण नहीं चलाते, विशेषकर जब वे संकट के समय हों। शत्रुओं के वध की प्रशंसा तो केवल उपयुक्त अवसरों (जैसे युद्ध आदि) पर ही की जाती है। | mahabharat अध्याय 1.117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृग बोला - मनुष्य अपने शत्रुओं पर भी बाण नहीं चलाते, विशेषकर जब वे संकट के समय हों। शत्रुओं के वध की प्रशंसा तो केवल उपयुक्त अवसरों (जैसे युद्ध आदि) पर ही की जाती है।
The deer said - Humans do not shoot arrows even at their enemies, especially when they are in a time of crisis. The killing of enemies is praised only on suitable occasions (like war etc.).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥