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पाण्डुरुवाच
शत्रूणां या वधे वृत्ति: सा मृगाणां वधे स्मृता।
राज्ञां मृग न मां मोहात् त्वं गर्हयितुमर्हसि॥ १२॥
अनुवाद
पाण्डु बोले, "शत्रुओं को मारने में राजाओं का आचरण मृग-हत्या के समान ही होता है। अतः हे मृग! तुम्हें आसक्तिवश मेरी निन्दा नहीं करनी चाहिए।"
Pandu said, 'The behaviour of kings in killing their enemies is as described in the killing of deer. Therefore, O deer, you should not criticise me out of attachment.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥