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mahabharat 1.116.2-14: वैशम्पायनजी ने कहा - (जनमेजय! धृतराष्ट्र के पुत्रों के नाम क्रमशः हैं -) 1. दुर्योधन, 2. युयुत्सु, 3. दुशासन, 4. दुःसह, 5. दुःशल, 6. जलसंध, 7. सम, 8. सह, 9. विन्द, 10. अनुविन्द, 11. दुर्धर्ष, 12. सुबाहु, 13. अनाचार, 14. दुर्मर्षण, 15. दुर्मुख, 16. दुष्कर्ण, 17. कर्ण, 18. विविंशति, 19. विकर्ण, 20. शैल, 21. सत्त्व, 22. सुलोचन, 23. आकृति, 24. उप आकृति, 25. चित्राक्ष, 26. चारुचित्राशरासन (चित्र मेहराब), 27. डर्माड, 28. दुर्विगह, 29. विवित्सु, 30. विकटानन (विकट), 31. उर्णनाभ, 32. सुनाभ (पद्मनाभ), 33. नंद, 34. उपनंद, 35. चित्रबाण (चित्राबाहु), 36. चित्रवर्मा, 37. सुवर्मा, 38. दुर्विरोचन, 39. अयोबाहु, 40. महाबाहु चित्रांग (चित्रांगद), 41. चित्रकुंडल (सुकुंडल), 42. भीमवेगा, 43. भीमबल, 44. बालकी, 45. बलवर्धन (विक्रम), 46. उग्रायुध, 47. सुषेण, 48. कुंडोदर, 49. सर, 50. चित्रायुध (दृधायुध), 51. निशांगी, 52. पाशी, 53. वृंदारक, 54. दुर्गवर्मा, 55. दुर्क्षत्र, 56. सोमकीर्ति, 57. अनुधार, 58. विधासंध, 59. जरासंध, 60. सत्यसंध, 61. सद: सुवाक (सहस्रावक), 62. उग्रश्रवा, 63. उग्रसेन, 64. सेनानी (सेनापति), 65. पराजय, 66. अपराजित, 67. पंडित, 68. विशालाक्ष, 69. दुराधर (दुराधन), 70. दृढ़ इच्छाशक्ति, 71. सुहस्त, 72. वातवेग, 73. सुवर्चा, 74. आदित्यकेतु, 75. बहवशी, 76. नागदत्त, 77. अग्राययी (अनुयायी), 78. कवची, 79. क्रथन, 80. दांडी, 81. दंड देने वाला, 82. धनु, 83. उग्र, 84. भीमरथ, 85. वीरबाहु, 86. अलोलुप, 87. अभय, 88. रौद्रकर्मा, 89. दृद्राथाश्रय (दृद्राथ), 90. अदृश्य, 91. कुंडभेदी, 92. वीरवि, 93. विचित्र कुण्डलों से सुशोभित प्रमथ, 94. प्रमथि, 95. वीर्य लंबे बाल (लंबे बाल), 96. लंबे हाथ, 97. महाबाहु व्यूधोरु, 98. कनकध्वज (कनकंगद), 99. कुंडशी (कुंडज) और 100. विरजा - ये धृतराष्ट्र के सौ पुत्र थे। इनके अलावा दुशाला नाम की एक कन्या भी थी, जो बीस वर्ष से अधिक की थी। 2-14॥   |   mahabharat अध्याय 1.116: धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंकी नामावली   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 116: धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंकी नामावली  »  श्लोक 2-14
 
 
श्लोक  1.116.2-14 
वैशम्पायन उवाच
दुर्योधनो युयुत्सुश्च राजन् दु:शासनस्तथा।
दु:सहो दु:शलश्चैव जलसंध: सम: सह:॥ २॥
विन्दानुविन्दौ दुर्धर्ष: सुबाहुर्दुष्प्रधर्षण:।
दुर्मर्षणो दुर्मुखश्च दुष्कर्ण: कर्ण एव च॥ ३॥
विविंशतिर्विकर्णश्च शल: सत्त्व: सुलोचन:।
चित्रोपचित्रौ चित्राक्षश्चारुचित्रशरासन:॥ ४॥
दुर्मदो दुर्विगाहश्च विवित्सुर्विकटानन:।
ऊर्णनाभ: सुनाभश्च तथा नन्दोपनन्दकौ॥ ५॥
चित्रबाणश्चित्रवर्मा सुवर्मा दुर्विरोचन:।
अयोबाहुर्महाबाहुश्चित्राङ्गश्चित्रकुण्डल:॥ ६॥
भीमवेगो भीमबलो बलाकी बलवर्धन:।
उग्रायुध: सुषेणश्च कुण्डोदरमहोदरौ॥ ७॥
चित्रायुधो निषङ्गी च पाशी वृन्दारकस्तथा।
दृढवर्मा दृढक्षत्र: सोमकीर्तिरनूदर:॥ ८॥
दृढसन्धो जरासन्ध: सत्यसन्ध: सद:सुवाक्।
उग्रश्रवा उग्रसेन: सेनानीर्दुष्पराजय:॥ ९॥
अपराजित: पण्डितको विशालाक्षो दुराधर:।
दृढहस्त: सुहस्तश्च वातवेगसुवर्चसौ॥ १०॥
आदित्यकेतुर्बह्वाशी नागदत्तोऽग्रयाय्यपि।
कवची क्रथन: दण्डी दण्डधारो धनुर्ग्रह:॥ ११॥
उग्रभीमरथौ वीरौ वीरबाहुरलोलुप:।
अभयो रौद्रकर्मा च तथा दृढरथाश्रय:॥ १२॥
अनाधृष्य: कुण्डभेदी विरावी चित्रकुण्डल:।
प्रमथश्च प्रमाथी च दीर्घरोमश्च वीर्यवान्॥ १३॥
दीर्घबाहुर्महाबाहुर्व्यूढोरु: कनकध्वज:।
कुण्डाशी विरजाश्चैव दु:शला च शताधिका॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी ने कहा - (जनमेजय! धृतराष्ट्र के पुत्रों के नाम क्रमशः हैं -) 1. दुर्योधन, 2. युयुत्सु, 3. दुशासन, 4. दुःसह, 5. दुःशल, 6. जलसंध, 7. सम, 8. सह, 9. विन्द, 10. अनुविन्द, 11. दुर्धर्ष, 12. सुबाहु, 13. अनाचार, 14. दुर्मर्षण, 15. दुर्मुख, 16. दुष्कर्ण, 17. कर्ण, 18. विविंशति, 19. विकर्ण, 20. शैल, 21. सत्त्व, 22. सुलोचन, 23. आकृति, 24. उप आकृति, 25. चित्राक्ष, 26. चारुचित्राशरासन (चित्र मेहराब), 27. डर्माड, 28. दुर्विगह, 29. विवित्सु, 30. विकटानन (विकट), 31. उर्णनाभ, 32. सुनाभ (पद्मनाभ), 33. नंद, 34. उपनंद, 35. चित्रबाण (चित्राबाहु), 36. चित्रवर्मा, 37. सुवर्मा, 38. दुर्विरोचन, 39. अयोबाहु, 40. महाबाहु चित्रांग (चित्रांगद), 41. चित्रकुंडल (सुकुंडल), 42. भीमवेगा, 43. भीमबल, 44. बालकी, 45. बलवर्धन (विक्रम), 46. उग्रायुध, 47. सुषेण, 48. कुंडोदर, 49. सर, 50. चित्रायुध (दृधायुध), 51. निशांगी, 52. पाशी, 53. वृंदारक, 54. दुर्गवर्मा, 55. दुर्क्षत्र, 56. सोमकीर्ति, 57. अनुधार, 58. विधासंध, 59. जरासंध, 60. सत्यसंध, 61. सद: सुवाक (सहस्रावक), 62. उग्रश्रवा, 63. उग्रसेन, 64. सेनानी (सेनापति), 65. पराजय, 66. अपराजित, 67. पंडित, 68. विशालाक्ष, 69. दुराधर (दुराधन), 70. दृढ़ इच्छाशक्ति, 71. सुहस्त, 72. वातवेग, 73. सुवर्चा, 74. आदित्यकेतु, 75. बहवशी, 76. नागदत्त, 77. अग्राययी (अनुयायी), 78. कवची, 79. क्रथन, 80. दांडी, 81. दंड देने वाला, 82. धनु, 83. उग्र, 84. भीमरथ, 85. वीरबाहु, 86. अलोलुप, 87. अभय, 88. रौद्रकर्मा, 89. दृद्राथाश्रय (दृद्राथ), 90. अदृश्य, 91. कुंडभेदी, 92. वीरवि, 93. विचित्र कुण्डलों से सुशोभित प्रमथ, 94. प्रमथि, 95. वीर्य लंबे बाल (लंबे बाल), 96. लंबे हाथ, 97. महाबाहु व्यूधोरु, 98. कनकध्वज (कनकंगद), 99. कुंडशी (कुंडज) और 100. विरजा - ये धृतराष्ट्र के सौ पुत्र थे। इनके अलावा दुशाला नाम की एक कन्या भी थी, जो बीस वर्ष से अधिक की थी। 2-14॥
 
Vaishampayanji said – (Janamejaya! The names of Dhritarashtra's sons are respectively –) 1. Duryodhana, 2. Yuyutsu, 3. Dusshasan, 4. Dussah, 5. Dusshal, 6. Jalsandh, 7. Even, 8. Co, 9. Vind, 10. Anuvind, 11. Durdharsh, 12. Subahu, 13. Malpractice, 14. Durmarshan, 15. Durmukh, 16. Dushkarna, 17. Karna, 18. Vivinshati, 19. Diagonal, 20. Shall, 21. Sattva, 22. Sulochan, 23. Figure, 24. Subfigure, 25. Chitraksha, 26. Charuchitrasharasana (picture arch), 27. Durmad, 28. Durvigah, 29. Vivitsu, 30. Vikatanan (Vikat), 31. उर्णनाभ, 32. Sunabha (Padmanabha), 33. Nand, 34. Upananda, 35. Chitrabaan (Chitrabahu), 36. Chitravarma, 37. Suvarma, 38. Durvirochana, 39. Ayobahu, 40. Mahabahu Chitrang (Chitrangad), 41. Chitrakundal (Sukundal), 42. Bhimvega, 43. Bhimbal, 44. Balaki, 45. Balvardhan (Vikram), 46. Ugrayudha, 47. Sushen, 48. Kundodar, 49. Sir, 50. Chitrayudh (Dridhayudh), 51. Nishangi, 52. Pashi, 53. Vrindarak, 54. Durgavarma, 55. Durkshatra, 56. Somkirti, 57. Anudhar, 58. Vidhasandha, 59. Jarasandha, 60. Satyasandha, 61. Sad: Suvaak (Sahasravaak), 62. Ugrashrava, 63. Ugrasen, 64. Fighter (commander), 65. Defeat, 66. Undefeated, 67. Pandit, 68. Vishalaksha, 69. Duradhar (Duradhan), 70. Strong-willed, 71. Suhast, 72. Vaatveg, 73. Suvarcha, 74. Adityaketu, 75. Bahvashi, 76. Nagadutt, 77. Agrayayi (follower), 78. Kavachi, 79. Krathan, 80. Dandi, 81. Punisher, 82. Sagittarius, 83. Furious, 84. Bhimrath, 85. Veerbahu, 86. Alolup, 87. Abhay, 88. Roudrakarma, 89. दृद्राथाश्रय (दृद्राथा), 90. Invisible, 91. Kundbhedi, 92. Viravi, 93. Pramath adorned with strange earrings, 94. Pramathi, 95. Seminal long hair (long hair), 96. Long-armed, 97. Mahabahu Vyudhoru, 98. Kanakadhvaja (Kanakangad), 99. Kundashi (Kundaj) and 100. Virja – These were the hundred sons of Dhritarashtra. Apart from these, there was a girl named Dushala, who was more than twenty years old. 2-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)