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mahabharat 1.115.16: व्यास बोले, "गांधारी! मैंने झूठ नहीं कहा; ये कुल सौ पुत्र हैं। सौ के अतिरिक्त एक भाग और बचा है, जिससे तुम्हें एक पौत्र प्राप्त होगा। इस भाग से तुम्हें अपनी इच्छानुसार सौभाग्यवती पुत्री प्राप्त होगी।"   |   mahabharat अध्याय 1.115: दु:शलाके जन्मकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 115: दु:शलाके जन्मकी कथा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.115.16 
व्यास उवाच
पूर्णं पुत्रशतं त्वेतन्न मिथ्या वागुदाहृता।
दौहित्रयोगाय भाग एक: शिष्ट: शतात् पर:।
एषा ते सुभगा कन्या भविष्यति यथेप्सिता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
व्यास बोले, "गांधारी! मैंने झूठ नहीं कहा; ये कुल सौ पुत्र हैं। सौ के अतिरिक्त एक भाग और बचा है, जिससे तुम्हें एक पौत्र प्राप्त होगा। इस भाग से तुम्हें अपनी इच्छानुसार सौभाग्यवती पुत्री प्राप्त होगी।"
 
Vyasa said, "Gandhari! I did not lie; these are a total of hundred sons. Apart from hundred, one more part is left, which will give you a grandson. With this part, you will get a fortunate daughter as per your wish." 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)