Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.115.12-15: कहते हैं कि स्त्रियों को पुत्र की अपेक्षा दामाद से अधिक प्रेम होता है। यदि मुझे भी सौ पुत्रों के अतिरिक्त एक पुत्री प्राप्त हो जाए, तो मैं अपने पुत्र और पुत्रवधू दोनों से युक्त होकर धन्य हो जाऊँगी। यदि मैंने सचमुच तप, दान या होम किया हो और अपने गुरुजनों की सेवा करके उन्हें प्रसन्न किया हो, तो मुझे अवश्य ही पुत्री प्राप्त होगी। इतने में ही श्रेष्ठ ऋषि भगवान श्रीकृष्ण, वेदव्यास ने स्वयं उस मांसपिंड को भागों में विभाजित कर दिया और सभी सौ भागों की गिनती करके गांधारी को बताया। 12-15॥ | mahabharat अध्याय 1.115: दु:शलाके जन्मकी कथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कहते हैं कि स्त्रियों को पुत्र की अपेक्षा दामाद से अधिक प्रेम होता है। यदि मुझे भी सौ पुत्रों के अतिरिक्त एक पुत्री प्राप्त हो जाए, तो मैं अपने पुत्र और पुत्रवधू दोनों से युक्त होकर धन्य हो जाऊँगी। यदि मैंने सचमुच तप, दान या होम किया हो और अपने गुरुजनों की सेवा करके उन्हें प्रसन्न किया हो, तो मुझे अवश्य ही पुत्री प्राप्त होगी। इतने में ही श्रेष्ठ ऋषि भगवान श्रीकृष्ण, वेदव्यास ने स्वयं उस मांसपिंड को भागों में विभाजित कर दिया और सभी सौ भागों की गिनती करके गांधारी को बताया। 12-15॥
It is said that women have more love for their son-in-law than for their son. If I too get one daughter in addition to a hundred sons, I will be blessed by being surrounded by both my son and my daughter-in-law. If I have really done penance, charity or home and have pleased my teachers by serving them, then I will definitely get a daughter. Meanwhile, the best sage, Lord Shri Krishna, Ved Vyas himself divided that flesh into parts and after counting all the hundred parts, told Gandhari. 12-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥