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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति
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श्लोक 37
श्लोक
1.114.37
शतमेकोनमप्यस्तु पुत्राणां ते महीपते।
त्यजैनमेकं शान्तिं चेत् कुलस्येच्छसि भारत॥ ३७॥
अनुवाद
'महीपति! आपके निन्यानवे पुत्र ही हों; भरत! यदि आप अपने कुल की शान्ति चाहते हैं, तो इस एक पुत्र का त्याग कर दीजिए।'
'Mahipati! May you have only ninety-nine sons; Bharat! If you want peace for your clan, then give up this one son.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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