श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 34-36
 
 
श्लोक  1.114.34-36 
लक्षयित्वा निमित्तानि तानि घोराणि सर्वश:।
तेऽब्रुवन् ब्राह्मणा राजन् विदुरश्च महामति:॥ ३४॥
यथेमानि निमित्तानि घोराणि मनुजाधिप।
उत्थितानि सुते जाते ज्येष्ठे ते पुरुषर्षभ॥ ३५॥
व्यक्तं कुलान्तकरणो भवितैष सुतस्तव।
तस्य शान्ति: परित्यागे गुप्तावपनयो महान्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! सर्वत्र हो रहे भयंकर अपशकुनों को देखकर ब्राह्मण तथा परम बुद्धिमान विदुरजी इस प्रकार बोले - 'हे नरश्रेष्ठ! आपके ज्येष्ठ पुत्र के जन्म के समय जिस प्रकार ये भयंकर अपशकुन दिखाई दे रहे हैं, उनसे स्पष्ट है कि आपका यह पुत्र सम्पूर्ण कुल का नाश करने वाला होगा। यदि इसका परित्याग कर दिया जाए, तो समस्त क्लेश शांत हो जाएंगे और यदि इसकी रक्षा की जाए, तो भविष्य में कोई बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।'
 
O King! Looking at the terrible omens that were happening everywhere, the Brahmins and the most intelligent Vidurji spoke thus - 'O best of the men! The way these terrible omens are appearing on the birth of your eldest son, it is clear from them that this son of yours will be the destroyer of the entire family. If he is abandoned, then all the troubles will be pacified and if he is protected, then a big trouble will arise in the future.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)