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mahabharat 1.114.32: 'परन्तु उसके बाद मेरा यह पुत्र सबसे बड़ा है। क्या यह भी राजा बन सकेगा? तुम लोग इस पर विचार करो और मुझे सच-सच बताओ। जो कुछ होने वाला है, वह मुझे स्पष्ट रूप से बताओ।'॥32॥   |   mahabharat अध्याय 1.114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.114.32 
अयं त्वनन्तरस्तस्मादपि राजा भविष्यति।
एतद् विब्रूत मे तथ्यं यदत्र भविता ध्रुवम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'परन्तु उसके बाद मेरा यह पुत्र सबसे बड़ा है। क्या यह भी राजा बन सकेगा? तुम लोग इस पर विचार करो और मुझे सच-सच बताओ। जो कुछ होने वाला है, वह मुझे स्पष्ट रूप से बताओ।'॥32॥
 
'But after him, this son of mine is the eldest. Will he also be able to become the king? You all should think about this and tell me the truth. Whatever is going to happen, tell me clearly.'॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)