Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.114.29-30: बड़ी जोर की आंधी चलने लगी। ऐसा प्रतीत होने लगा मानो सब ओर अग्नि जल रही हो। हे राजन! तब राजा धृतराष्ट्र भयभीत हो गए और उन्होंने बहुत से ब्राह्मणों, भीष्म, विदुर, अन्य मित्रों तथा समस्त कुरुवंशियों को अपने पास बुलाकर उनसे इस प्रकार कहा -॥29-30॥ | mahabharat अध्याय 1.114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बड़ी जोर की आंधी चलने लगी। ऐसा प्रतीत होने लगा मानो सब ओर अग्नि जल रही हो। हे राजन! तब राजा धृतराष्ट्र भयभीत हो गए और उन्होंने बहुत से ब्राह्मणों, भीष्म, विदुर, अन्य मित्रों तथा समस्त कुरुवंशियों को अपने पास बुलाकर उनसे इस प्रकार कहा -॥29-30॥
A strong storm started blowing. It seemed as if fire was burning in all directions. O King! Then King Dhritarashtra became frightened and called many Brahmins, Bhishma and Vidur, other friends and all the Kuru clan members near him and spoke to them in this manner -॥ 29-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥