श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.114.17 
व्यास उवाच
एवमेतत् सौबलेयि नैतज्जात्वन्यथा भवेत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
व्यास बोले, "हे सुबलकुमारी! यह सब मेरे आशीर्वाद से हो रहा है, अन्यथा कभी नहीं हो सकता।"
 
Vyasa said, "O Subalkumari! All this is happening according to my blessing; it can never happen otherwise."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)