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mahabharat 1.114.14: मन्त्र जपने वालों में श्रेष्ठ व्यास ने उस मांसपिण्ड को देखकर गांधारी से पूछा, “तुम इसका क्या करना चाहती थीं?”॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.114.14 
तां स मांसमयीं पेशीं ददर्श जपतां वर:।
ततोऽब्रवीत् सौबलेयीं किमिदं ते चिकीर्षितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मन्त्र जपने वालों में श्रेष्ठ व्यास ने उस मांसपिण्ड को देखकर गांधारी से पूछा, “तुम इसका क्या करना चाहती थीं?”॥14॥
 
Vyasa, the best among those who chant mantras, saw that lump of flesh and asked Gandhari, “What did you want to do with it?”॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)