Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.114.11-12: वह अपने पेट की कठोरता को लेकर बहुत चिंतित हो गईं। गांधारी दुःख के मारे बेहोश होने लगीं। धृतराष्ट्र की जानकारी के बिना, उन्होंने अपने पेट पर ज़ोर से प्रहार किया। तभी उनके गर्भ से एक मांस का पिंड प्रकट हुआ, जो लोहे के समान कठोर था। 11-12. | mahabharat अध्याय 1.114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह अपने पेट की कठोरता को लेकर बहुत चिंतित हो गईं। गांधारी दुःख के मारे बेहोश होने लगीं। धृतराष्ट्र की जानकारी के बिना, उन्होंने अपने पेट पर ज़ोर से प्रहार किया। तभी उनके गर्भ से एक मांस का पिंड प्रकट हुआ, जो लोहे के समान कठोर था। 11-12.
She became very worried about the firmness of her abdomen. Gandhari was fainting out of grief. Without Dhritarashtra's knowledge, she struck her abdomen with great effort. Then a lump of flesh appeared from her womb, which was as hard as a lump of iron. 11-12.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥