Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.113.6-7: भरतश्रेष्ठ! राजा पाण्डु ने आलस्य पर विजय प्राप्त कर ली थी। कुन्ती और माद्री की प्रेरणा से वे राजभवन और सुन्दर शय्याओं को त्यागकर वन में रहने लगे। पाण्डु सदैव वन में रहकर शिकार खेला करते थे। 6-7॥ | mahabharat अध्याय 1.113: राजा पाण्डुका पत्नियोंसहित वनमें निवास तथा विदुरका विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सम्प्रयुक्तस्तु कुन्त्या च माद्रॺा च भरतर्षभ।
जिततन्द्रीस्तदा पाण्डुर्बभूव वनगोचर:॥ ६॥
हित्वा प्रासादनिलयं शुभानि शयनानि च।
अरण्यनित्य: सततं बभूव मृगयापर:॥ ७॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! राजा पाण्डु ने आलस्य पर विजय प्राप्त कर ली थी। कुन्ती और माद्री की प्रेरणा से वे राजभवन और सुन्दर शय्याओं को त्यागकर वन में रहने लगे। पाण्डु सदैव वन में रहकर शिकार खेला करते थे। 6-7॥
Bharatshrestha! King Pandu had conquered laziness. With the inspiration of Kunti and Madri, they left the palace residences and beautiful beds and started living in the forest. Pandu always used to live in the forest and play hunting. 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥