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mahabharat 1.112.34-35: राजाओं ने जो भी बहुमूल्य रत्न, मोती, मूंगा, सोना, चांदी, गौ-रत्न, अश्व-रत्न, रथ-रत्न, हाथी, गधे, ऊँट, भैंस, बकरी, भेड़, कम्बल, मृगचर्म, रत्न, मृगचर्म से बने बिछौने आदि दिये, उन सबको हस्तिनापुर के राजा पाण्डु ने स्वीकार कर लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  1.112.34-35 
मणिमुक्ताप्रवालं च सुवर्णं रजतं बहु।
गोरत्नान्यश्वरत्नानि रथरत्नानि कुञ्जरान्॥ ३४॥
खरोष्ट्रमहिषीश्चैव यच्च किंचिदजाविकम्।
कम्बलाजिनरत्नानि राङ्कवास्तरणानि च।
तत् सर्वं प्रतिजग्राह राजा नागपुराधिप:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
राजाओं ने जो भी बहुमूल्य रत्न, मोती, मूंगा, सोना, चांदी, गौ-रत्न, अश्व-रत्न, रथ-रत्न, हाथी, गधे, ऊँट, भैंस, बकरी, भेड़, कम्बल, मृगचर्म, रत्न, मृगचर्म से बने बिछौने आदि दिये, उन सबको हस्तिनापुर के राजा पाण्डु ने स्वीकार कर लिया।
 
Whatever heaps of precious stones, pearls, corals, gold, silver, cow-gems, horse-gems, chariot-gems, elephants, donkeys, camels, buffaloes, goats, sheep, blankets, deerskins, gems, beddings made of the skin of the deer etc. were given by the kings, King Pandu, the ruler of Hastinapur, accepted them all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)