तमागतमभिश्रुत्य भीष्मं बाह्लीकपुङ्गव:।
प्रत्युद्गम्यार्चयित्वा च पुरं प्रावेशयन्नृप:॥ ३॥
अनुवाद
बाह्लीकश्रिओमणि के आगमन की खबर सुनकर राजा शल्य भीष्मजी के स्वागत के लिए नगर से बाहर आये और उनका यथोचित स्वागत-सत्कार करके उन्हें राजधानी के अन्दर ले गये।
On hearing of the arrival of the Bahlikashriomani King Shalya came out of the city to receive Bhishmaji and after giving him a proper welcome and hospitality took him inside the capital.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥