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mahabharat 1.112.21: जनमेजय! कुरुवंश के राजा पाण्डु तीस रात तक भ्रमण करने के बाद सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतने की इच्छा से राजधानी से निकले।   |   mahabharat अध्याय 1.112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.112.21 
तत: स कौरवो राजा विहृत्य त्रिदशा निशा:।
जिगीषया महीं पाण्डुर्निरक्रामत् पुरात् प्रभो॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! कुरुवंश के राजा पाण्डु तीस रात तक भ्रमण करने के बाद सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतने की इच्छा से राजधानी से निकले।
 
Janamejaya! After roaming around for thirty nights, King Pandu of the Kuru dynasty left the capital with the desire to conquer the entire earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)