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mahabharat 1.112.14-15: ऐसा कहकर महाबली भीष्म ने राजा शल्य को स्वर्ण, उससे बने आभूषण तथा नाना प्रकार के सहस्त्रों रत्न प्रदान किए। साथ ही उन्होंने उन्हें अनेक हाथी, घोड़े, रथ, वस्त्र, आभूषण, रत्न, मोती और मूंगा भी दिए।   |   mahabharat अध्याय 1.112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  1.112.14-15 
इत्युक्त्वा स महातेजा: शातकुम्भं कृताकृतम्।
रत्नानि च विचित्राणि शल्यायादात् सहस्रश:॥ १४॥
गजानश्वान् रथांश्चैव वासांस्याभरणानि च।
मणिमुक्ताप्रवालं च गाङ्गेयो व्यसृजच्छुभम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर महाबली भीष्म ने राजा शल्य को स्वर्ण, उससे बने आभूषण तथा नाना प्रकार के सहस्त्रों रत्न प्रदान किए। साथ ही उन्होंने उन्हें अनेक हाथी, घोड़े, रथ, वस्त्र, आभूषण, रत्न, मोती और मूंगा भी दिए।
 
Saying this, the mighty Bhishma presented King Shalya with gold and ornaments made of it and thousands of precious stones of various kinds. He also gave him many elephants, horses, chariots, clothes, ornaments and precious stones, pearls and corals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)