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mahabharat 1.112.13: यदि तुम्हारे पूर्वजों ने इस विधि को स्वीकार किया है, तो इसमें कोई दोष नहीं है। शल्य! हम सब तुम्हारे कुल की मर्यादा को जानते हैं, जिसका आदर पुण्यात्मा पुरुष करते हैं।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.112.13 
नात्र कश्चन दोषोऽस्ति पूर्वैर्विधिरयं कृत:।
विदितेयं च ते शल्य मर्यादा साधुसम्मता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम्हारे पूर्वजों ने इस विधि को स्वीकार किया है, तो इसमें कोई दोष नहीं है। शल्य! हम सब तुम्हारे कुल की मर्यादा को जानते हैं, जिसका आदर पुण्यात्मा पुरुष करते हैं।॥13॥
 
‘If your ancestors have accepted this method, then there is no fault in it. Shalya! We all know about your family honour, which is respected by the virtuous men.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)