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mahabharat 1.112.10: 'यह तो सभी जानते हैं, आप भी जानते होंगे। हे महामुनि! ऐसी स्थिति में आपका यह कहना उचित नहीं है कि आप मुझे अपनी पुत्री दे दीजिए।'॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.112.10 
व्यक्तं तद् भवतश्चापि विदितं नात्र संशय:।
न च युक्तं तथा वक्तुं भवान् देहीति सत्तम॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'यह तो सभी जानते हैं, आप भी जानते होंगे। हे महामुनि! ऐसी स्थिति में आपका यह कहना उचित नहीं है कि आप मुझे अपनी पुत्री दे दीजिए।'॥10॥
 
'This is known to everyone, you must also know this. O great saint! In this situation it is not right for you to say give me your daughter.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)