श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 111: कुन्तीद्वारा स्वयंवरमें पाण्डुका वरण और उनके साथ विवाह  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  1.111.8-9 
व्रीडमाना स्रजं कुन्ती राज्ञ: स्कन्धे समासजत्।
तं निशम्य वृतं पाण्डुं कुन्त्या सर्वे नराधिपा:॥ ८॥
यथागतं समाजग्मुर्गजैरश्वै रथैस्तथा।
ततस्तस्या: पिता राजन् विवाहमकरोत् प्रभु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कुंती ने लज्जित होकर राजा पाण्डु के गले में माला डाल दी। जब सभी राजाओं ने सुना कि कुंती ने राजा पाण्डु को चुन लिया है, तो वे जिस प्रकार हाथी, घोड़े और रथ पर सवार होकर आए थे, उसी प्रकार अपने-अपने स्थान को लौट गए। हे राजन! तब उसके पिता ने (शास्त्रों के अनुसार) कुंती का विवाह पाण्डु के साथ कर दिया।
 
Kunti shyly placed the garland around King Pandu's neck. When all the kings heard that Kunti had chosen King Pandu, they returned to their respective places in the same way they had come on elephants, horses and chariots. O King! Then her father got Kunti married to Pandu (according to the scriptures). 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)