Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.111.6-7: वे उस राजसभा में द्वितीय इन्द्र के समान विराजमान थे। निर्मल शरीर और शुभ लक्षणों वाली भोजपुत्री कुन्ती, स्वयंवर के युद्धस्थल में पुरुषोत्तम पाण्डु को देखकर, उन्हें पाने के लिए हृदय में व्याकुल हो उठीं। उनके शरीर के सभी अंग काम से भर गए और उनका मन भी एकाएक व्याकुल हो गया। | mahabharat अध्याय 1.111: कुन्तीद्वारा स्वयंवरमें पाण्डुका वरण और उनके साथ विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे उस राजसभा में द्वितीय इन्द्र के समान विराजमान थे। निर्मल शरीर और शुभ लक्षणों वाली भोजपुत्री कुन्ती, स्वयंवर के युद्धस्थल में पुरुषोत्तम पाण्डु को देखकर, उन्हें पाने के लिए हृदय में व्याकुल हो उठीं। उनके शरीर के सभी अंग काम से भर गए और उनका मन भी एकाएक व्याकुल हो गया।
He was seated in that royal court like a second Indra. Kunti, the daughter of Bhoja, with flawless body and auspicious features, seeing the best of men Pandu in the battlefield of Swayamvar, became restless in her heart to get him. All her body parts were filled with lust and her mind became restless all at once. 6-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥