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mahabharat 1.111.5: वह सिंह के समान गर्व से भरा हुआ था। उसकी छाती बहुत चौड़ी थी। उसकी आँखें बैल की आँखों जैसी बड़ी थीं। उसका बल अपार था। वह सूर्यदेव की तरह चमक रहा था, और अपने तेज से सभी राजाओं के तेज को ढक रहा था।   |   mahabharat अध्याय 1.111: कुन्तीद्वारा स्वयंवरमें पाण्डुका वरण और उनके साथ विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 111: कुन्तीद्वारा स्वयंवरमें पाण्डुका वरण और उनके साथ विवाह  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.111.5 
सिंहदर्पं महोरस्कं वृषभाक्षं महाबलम्।
आदित्यमिव सर्वेषां राज्ञां प्रच्छाद्य वै प्रभा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वह सिंह के समान गर्व से भरा हुआ था। उसकी छाती बहुत चौड़ी थी। उसकी आँखें बैल की आँखों जैसी बड़ी थीं। उसका बल अपार था। वह सूर्यदेव की तरह चमक रहा था, और अपने तेज से सभी राजाओं के तेज को ढक रहा था।
 
He was exuding pride like a lion. His chest was very broad. His eyes were large like the eyes of a bull. His strength was great. He was shining like the Sun God, covering the radiance of all the kings with his brilliance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)