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mahabharat 1.110.d1: 'भद्रे! तुम्हारे आह्वान पर ही मैं ऋषि दुर्वासा द्वारा दिए गए मंत्र से प्रेरित होकर तुम्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित हूँ। हे शुद्ध मुस्कान वाली कुन्ती! मुझे सूर्यदेव ही समझो।'   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  1.110.d1 
(आहूतोपस्थितं भद्रे ऋषिमन्त्रेण चोदितम्।
विद्धि मां पुत्रलाभाय देवमर्कं शुचिस्मिते॥ )
 
 
अनुवाद
'भद्रे! तुम्हारे आह्वान पर ही मैं ऋषि दुर्वासा द्वारा दिए गए मंत्र से प्रेरित होकर तुम्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित हूँ। हे शुद्ध मुस्कान वाली कुन्ती! मुझे सूर्यदेव ही समझो।'
 
'Bhadra! I am here as soon as you called me, inspired by the mantra given by sage Durvasa, to bless you with a son. O Kunti with a pure smile! Consider me as the Sun God.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)