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mahabharat 1.110.8: जब ऋषि दुर्वासा ने यह कहा, तो कुंती बहुत उत्सुक हो गईं। हालाँकि वह प्रसिद्ध राजकुमारी अभी कुंवारी थी, फिर भी उसने मंत्र की परीक्षा लेने के लिए सूर्य देव का आह्वान किया।   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.110.8 
तथोक्ता सा तु विप्रेण कुन्ती कौतूहलान्विता।
कन्या सती देवमर्कमाजुहाव यशस्विनी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब ऋषि दुर्वासा ने यह कहा, तो कुंती बहुत उत्सुक हो गईं। हालाँकि वह प्रसिद्ध राजकुमारी अभी कुंवारी थी, फिर भी उसने मंत्र की परीक्षा लेने के लिए सूर्य देव का आह्वान किया।
 
When sage Durvasa said this, Kunti became very curious. Though the famous princess was still a virgin, she invoked the Sun God to test the mantra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)