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mahabharat 1.110.7: 'शुभ! इस मंत्र से तुम जिस भी देवता का आह्वान करोगे, उनकी कृपा से तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी।'   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.110.7 
यं यं देवं त्वमेतेन मन्त्रेणावाहयिष्यसि।
तस्य तस्य प्रसादेन पुत्रस्तव भविष्यति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'शुभ! इस मंत्र से तुम जिस भी देवता का आह्वान करोगे, उनकी कृपा से तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी।'
 
'Shubh! Whichever deity you invoke with this mantra, by his grace you will be blessed with a son.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)