Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.110.31: पहले इस पृथ्वी पर उसका नाम वसुषेण था। तत्पश्चात् अपने शरीर से कवच काट डालने के कारण वह कर्ण और वैकर्तन नाम से भी प्रसिद्ध हुआ ॥31॥ | mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पहले इस पृथ्वी पर उसका नाम वसुषेण था। तत्पश्चात् अपने शरीर से कवच काट डालने के कारण वह कर्ण और वैकर्तन नाम से भी प्रसिद्ध हुआ ॥31॥
Earlier on this earth his name was called Vasushena. After that, because of cutting the armor from his body, he also became famous by the names Karna and Vaikartan. 31॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि कर्णसम्भवे दशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें कर्णकी उत्पत्तिसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ दसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११०॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४४ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥