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mahabharat 1.110.30: 'वीरवर! देवता, दानव, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षस इन सबमें से जिसे भी तुम जीतने का प्रयत्न करोगे, वह इस शक्ति के प्रहार से नष्ट हो जायेगा। 30॥   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.110.30 
देवासुरमनुष्याणां गन्धर्वोरगरक्षसाम्।
यमेकं जेतुमिच्छेथा: सोऽनया न भविष्यति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'वीरवर! देवता, दानव, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षस इन सबमें से जिसे भी तुम जीतने का प्रयत्न करोगे, वह इस शक्ति के प्रहार से नष्ट हो जायेगा। 30॥
 
'Veervar! Whichever one you try to conquer among gods, demons, humans, Gandharvas, serpents and demons, will be destroyed by the attack of this power. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)