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mahabharat 1.110.29: वैशम्पायन कहते हैं: तब देवराज इन्द्र ने उसे बदले में एक भाला दिया और कहा: ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.110.29 
वैशम्पायन उवाच
ददौ शक्तिं सुरपतिर्वाक्यं चेदमुवाच ह॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: तब देवराज इन्द्र ने उसे बदले में एक भाला दिया और कहा: ॥29॥
 
Vaishmpayana says: Then the king of gods Indra gave him a spear in return and said: ॥29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)