Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.110.25: जैसे-जैसे वह बालक बड़ा होता गया, वह सब प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों में निपुण होता गया। पराक्रमी कर्ण प्रातःकाल से लेकर सूर्य के पश्चिम की ओर चले जाने तक सूर्योपस्थानम किया करता था॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स वर्धमानो बलवान् सर्वास्त्रेषूद्यतोऽभवत्।
आ पृष्ठतापादादित्यमुपातिष्ठत वीर्यवान्॥ २५॥
अनुवाद
जैसे-जैसे वह बालक बड़ा होता गया, वह सब प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों में निपुण होता गया। पराक्रमी कर्ण प्रातःकाल से लेकर सूर्य के पश्चिम की ओर चले जाने तक सूर्योपस्थानम किया करता था॥ 25॥
As the boy grew up, he became proficient in all kinds of weapons. The valiant Karna used to perform Suryaopasthanam from morning till the sun moved towards the west.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥