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mahabharat 1.110.23: जल में छोड़े गए नवजात शिशु को महान् रथी पुत्र अधिरथ ने, जिनकी पत्नी का नाम राधा था, ग्रहण किया और अपनी पत्नी सहित उस बालक को अपना पुत्र मान लिया॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.110.23 
तमुत्सृष्टं जले गर्भं राधाभर्ता महायशा:।
पुत्रत्वे कल्पयामास सभार्य: सूतनन्दन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जल में छोड़े गए नवजात शिशु को महान् रथी पुत्र अधिरथ ने, जिनकी पत्नी का नाम राधा था, ग्रहण किया और अपनी पत्नी सहित उस बालक को अपना पुत्र मान लिया॥23॥
 
The newly born child left in the water was taken by the very famous charioteer's son Adhiratha, whose wife's name was Radha. He and his wife adopted the child as their son.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)