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mahabharat 1.110.22: उस समय कुंती ने अपने परिवार वालों से अपना अपराध छिपाते हुए पराक्रमी पुत्र कर्ण को जल में छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.110.22 
गूहमानापचारं सा बन्धुपक्षभयात् तदा।
उत्ससर्ज कुमारं तं जले कुन्ती महाबलम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस समय कुंती ने अपने परिवार वालों से अपना अपराध छिपाते हुए पराक्रमी पुत्र कर्ण को जल में छोड़ दिया।
 
At that time, Kunti, hiding her wrongful act from her family members, left the mighty son Karna in the water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)