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mahabharat 1.110.20: उत्तम तेज वाले भगवान सूर्य ने कुन्ती को कौमार्य प्रदान किया। तत्पश्चात् तपस्वियों में श्रेष्ठ भगवान सूर्य देवलोक को चले गए॥20॥   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.110.20 
प्रादाच्च तस्यै कन्यात्वं पुन: स परमद्युति:।
दत्त्वा च तपतां श्रेष्ठो दिवमाचक्रमे तत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उत्तम तेज वाले भगवान सूर्य ने कुन्ती को कौमार्य प्रदान किया। तत्पश्चात् तपस्वियों में श्रेष्ठ भगवान सूर्य देवलोक को चले गए॥20॥
 
Surya, the God of excellent light, restored virginity to Kunti. After that, Lord Surya, the best among the austere ones, went to the world of gods. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)