Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.110.19: वह बालक जन्म से ही कवच धारण किए हुए था और उसका मुखमंडल जन्म से ही कुण्डलों से चमक रहा था। इस प्रकार सम्पूर्ण लोकों में विख्यात कर्ण नामक पुत्र उत्पन्न हुआ॥19॥ | mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह बालक जन्म से ही कवच धारण किए हुए था और उसका मुखमंडल जन्म से ही कुण्डलों से चमक रहा था। इस प्रकार सम्पूर्ण लोकों में विख्यात कर्ण नामक पुत्र उत्पन्न हुआ॥19॥
That child wore armour right from his birth and his face was shining with the earrings he had born. Thus was born a son named Karna, who is famous in all the worlds.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥