Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.110.17-18: 'महारानी! मेरी कृपा से तुम्हें कोई दोष नहीं लगेगा।' ऐसा कहकर कुन्तीपुत्री कुन्ती से प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न करने वाले सूर्यदेव ने समागम किया। उसी क्षण से एक वीर पुत्र उत्पन्न हुआ, जो समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ था। वह जन्म से ही कवच-कुण्डल धारण किए हुए था और देवताओं के पुत्र के समान तेजस्वी और शोभायमान था।॥17-18॥ | mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मत्प्रसादान्न ते राज्ञि भविता दोष इत्युत।
एवमुक्त्वा स भगवान् कुन्तिराजसुतां तदा॥ १७॥
प्रकाशकर्ता तपन: सम्बभूव तया सह।
तत्र वीर: समभवत् सर्वशस्त्रभृतां वर:।
आमुक्तकवच: श्रीमान् देवगर्भ: श्रियान्वित:॥ १८॥
अनुवाद
'महारानी! मेरी कृपा से तुम्हें कोई दोष नहीं लगेगा।' ऐसा कहकर कुन्तीपुत्री कुन्ती से प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न करने वाले सूर्यदेव ने समागम किया। उसी क्षण से एक वीर पुत्र उत्पन्न हुआ, जो समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ था। वह जन्म से ही कवच-कुण्डल धारण किए हुए था और देवताओं के पुत्र के समान तेजस्वी और शोभायमान था।॥17-18॥
‘Queen! You will not be blamed by my grace.’ Saying this to Kunti, the princess of Kunti, the Sun God who produces light and heat had intercourse with her. From this moment onwards, a brave son was born, who was the best among all the weapon holders. He wore armour from birth and was as radiant and graceful as a son of the gods.॥17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥