Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.110.15: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे भरत! भगवान सूर्य ने कुन्ती को समझाते हुए ऐसी बहुत सी बातें कहीं; परन्तु सुन्दरी कुन्ती ने यह सोचकर कि वह अभी भी कुमारी है, उनके साथ समागम की इच्छा नहीं की। | mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे भरत! भगवान सूर्य ने कुन्ती को समझाते हुए ऐसी बहुत सी बातें कहीं; परन्तु सुन्दरी कुन्ती ने यह सोचकर कि वह अभी भी कुमारी है, उनके साथ समागम की इच्छा नहीं की।
Vaishmpayana says - O Bharata! Lord Surya said many such things to Kunti while explaining to her; but thinking that she was still a virgin, the beautiful Kunti did not desire intercourse with him. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥