Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.110.13: सूर्यदेव ने कहा, "हे शुभ! मैं जानता हूँ कि दुर्वासा ने तुम्हें आशीर्वाद दिया है। अपना भय त्याग दो और यहीं मेरे साथ समागम करो।"   |   mahabharat अध्याय 1.110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.110.13 
सूर्य उवाच
वेदाहं सर्वमेवैतद् यद् दुर्वासा वरं ददौ।
संत्यज्य भयमेवेह क्रियतां संगमो मम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सूर्यदेव ने कहा, "हे शुभ! मैं जानता हूँ कि दुर्वासा ने तुम्हें आशीर्वाद दिया है। अपना भय त्याग दो और यहीं मेरे साथ समागम करो।"
 
The Sun God said, "O Shubh! I know that Durvasa has blessed you. Leave your fear and have intercourse with me here." 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)